साझा संसार फाऊंडेशन नीदरलैंड्स की पहल पर गणगौर त्योंहार पर विशेष 'भारतीय लोकगीत : जीवन में चेतना' विषय पर ऑनलाइन आयोजन सम्पन्न हुआ। इस आयोजन में डॉ रामा तक्षक के सान्न्ध्यि में, भारत से सुनीता महेश्वरी, स्पेन से पूजा अनिल, केन्या से कल्पना पारीक, दोहा कतर से विनीता कंँवर राठौड़, दुबई से अनु बाफना विदुषियों ने भाग लिया। इसका संयोजन व सभी प्रतिभागियों व श्रोताओं का स्वागत नीदरलैंड्स से अश्विनी केगांवकर ने किया। साथ ही इस आयोजन का बहुत ही जीवंत मंच संचालन केन्या से सारिका फलोर ने किया। साझा संसार फाऊंडेशन के अध्यक्ष डॉ रामा तक्षक ने अपने बीज वक्तव्य में 'भारतीय लोकगीतों में जीवन चेतना' पर प्रकाश डालते हुए बताया कि लोकगीत मानव जीवन की चेतना की ऊष्मा हैं। यह ऊष्मा जागरूकता की आग है। मानव की जीजीविषा, प्रेम और आध्यात्मिक प्यास इसका सबसे सुंदर उदाहरण हैं। सुनीता महेश्वरी ने बताया कि लोकगीत भारतीय संस्कृति की आत्मा है। उन्होंने अपनी पुस्तक 'आराधना के स्वर' से ''बहे प्रम पावन गंगा'' रचना की पंक्तियों के साथ साथ सुहाग देती गौरां, सौभाग्य देते ईसर, सुहाग...
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